सोमवार, 17 फ़रवरी 2025

संसदीय संस्कृत परिषद

 


नमो नमः। संसदीय संस्कृत परिषद के माध्यम से देश में संसद,विधानसभा एवं निकाय चुनावों में विजयी हुए नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि देववाणी संस्कृत में शपथ लें,ये सोच 80 के दशक के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख पूज्य मोरोपंत पिंगले जी,विहिप नेता अशोक सिंहल जी एवं महंत अवैद्यनाथ जी ने धरातल पर उतारने का निश्चय किया था। संसदीय संस्कृत परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय रामावतार धानुका जी और महासचिव डॉ.जीतराम भट्ट जी ने अथक परिश्रम से इस परंपरा को मिशन बनाकर आगे बढ़ाया। 1994 के बाद से इस अभियान में इन महानुभावों के साथ भारत संस्कृत परिषद Bharat Sanskrit Parishad भी सक्रिय हुई। डॉ.डी.बी.डेग्वेकर,के.का.शास्त्री,आचार्य रामनाथ सुमन,आचार्य राधाकृष्ण मनोड़ी और प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी के साथ गिलहरी वाली भूमिका में हम सबने इसे देशव्यापी बनाने का अभियान चलाया। 2000 के बाद अस्तित्व में आई संस्कृत भारती Samskrita Bharati ने भी संस्कृत शपथ के इस अभियान से जुड़कर इसे देशव्यापी बनाने में सहायता की। विहिप की ओर से पूज्य अशोक जी के बाद श्री चंपत राय Champat Rai जी ने इस अभियान को गतिमान बनाए रखा। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीते सभी विधायकों से ही नहीं राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनता से संसदीय संस्कृत परिषद Sansadiya Sanskrit Parishad यही आग्रह कर रही है कि आप लोग भी अपने स्तर पर अपने प्रतिनिधियों को संस्कृत भाषा में शपथ लेने को प्रेरित करें। ताकि आपका प्रतिनिधि उस शपथ से अपने दायित्व में नैतिकता,ईमानदारी,जनसेवा और जिम्मेदारी की भावना को बचाए रखे। शपथ का नमूना इस पत्र में अंकित है। शुभम् भवेत्।

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