सोमवार, 3 मार्च 2025

हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

  



हरियाणा के हिसार ( वीर बरबरान ) मे एक पीपल का पेड़ है जिसको वीर बर्बरीक ने श्री कृष्ण भगवान के कहने पर अपने वाणों से छेदन किया था !

 आज भी इन पत्तो में छेद है ! सबसे बड़ी बात ये है की जब इस पेड़ में नए पत्ते निकलते है तो उनमे भी छेद होता है ! सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि, इसके बीज से उत्पन्न नए पेड़ के भी पत्तों में छेद होता है ! यह पीपल का पेड़ महाभारत काल की घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण है और जो लोग रामायण और महाभारत जैसी घटनाओं को काल्पनिक करार देते है एवं यह कहते है कि इन घटनाओं को मानने वाले लोग काल्पनिक दुनिया में जीते हैं, उन लोगों के लिए यह किसी जोरदार तमाचे से कम नहीं होगा...जिन्होंने थोड़ी भी महाभारत पढ़ी होगी उन्हें वीर बर्बरीक वाला प्रसंग जरूर याद होगा ! उस प्रसंग में हुआ कुछ यूँ था कि महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था और भगवान श्री कृष्ण युद्ध में पाण्डवों के साथ थे ! जिससे यह निश्चित जान पड़ रहा था कि कौरव सेना भले ही अधिक शक्तिशाली है, लेकिन जीत पाण्डवों की ही होगी..ऐसे समय में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया कि युद्घ में जो पक्ष कमज़ोर होगा वह उनकी ओर से लड़ेगा ! इसके लिए, बर्बरीक ने महादेव को प्रसन्न करके उनसे तीन अजेय बाण प्राप्त किये थे ! परन्तु, भगवान श्री कृष्ण को जब बर्बरीक की योजना का पता चला तब वे ब्राह्मण का वेष धारण करके बर्बरीक के मार्ग में आ गये...श्री कृष्ण ने बर्बरीक को उत्तेजित करने हेतु उसका मजाक उड़ाया कि वह तीन बाणों से भला क्या युद्घ लड़ेगा ? कृष्ण की बातों को सुनकर बर्बरीक ने कहा कि उसके पास अजेय बाण है और, वह एक बाण से ही पूरी शत्रु सेना का अंत कर सकता है तथा, सेना का अंत करने के बाद उसका बाण वापस अपने स्थान पर लौट आएगा ! इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि हम जिस पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हैं अगर, अपने बाण से उसके सभी पत्तों को छेद कर दो तो मैं मान जाउंगा कि तुम एक बाण से युद्ध का परिणाम बदल सकते हो इस पर बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार करके भगवान का स्मरण किया और बाण चला दिया ! जिससे, पेड़ पर लगे पत्तों के अलावा नीचे गिरे पत्तों में भी छेद हो गया ! इसके बाद वो दिव्य बाण भगवान श्री कृष्ण के पैरों के चारों ओर घूमने लगा क्योंकि, एक पत्ता भगवान ने अपने पैरों के नीचे दबाकर रखा था...भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि धर्मरक्षा के लिए इस युद्ध में विजय पाण्डवों की होनी चाहिए और, माता को दिये वचन के अनुसार अगर बर्बरीक कौरवों की ओर से लड़ेगा तो अधर्म की जीत हो जाएगी ! इसलिए, इस अनिष्ट को रोकने के लिए ब्राह्मण वेषधारी श्री कृष्ण ने बर्बरीक से दान की इच्छा प्रकट की..जब बर्बरीक ने दान देने का वचन दिया ! तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उसका सिर मांग लिया ! जिससे बर्बरीक समझ गया कि ऐसा दान मांगने वाला ब्राह्मण नहीं हो सकता है और, बर्बरीक ने ब्राह्मण से वास्तविक परिचय माँगा तब श्री कृष्ण ने उन्हें बताया कि वह कृष्ण हैं...सच जानने के बाद भी बर्बरीक ने सिर देना स्वीकार कर लिया लेकिन, एक शर्त रखी कि, वह उनके विराट रूप को देखना चाहता है तथा, महाभारत युद्ध को शुरू से लेकर अंत तक देखने की इच्छा रखता है ! भगवान ने बर्बरीक की इच्छा पूरी करते हुए, सुदर्शन चक्र से बर्बरीक का सिर काटकर सिर पर अमृत का छिड़काव कर दिया और एक पहाड़ी के ऊंचे टीले पर रख दिया जहाँ से बर्बरीक के सिर ने पूरा युद्घ देखा..ये सारी घटना आधुनिक वीर बरबरान नामक जगह पर हुई थी जो हरियाणा के हिसार जिले में हैं ! अब ये जाहिर सी बात है कि इस जगह का नाम वीर बरबरान वीर बर्बरीक के नाम पर ही पड़ा है... 

खाटू श्याम जी जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं,हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

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शनिवार, 1 मार्च 2025

मार्च मास 2025 का पंचांग

  मार्च मास 2025 का पंचांग 

भारतीय व्रतोत्सव मार्च - 2025

दि. 1- श्री रामकृष्ण परमहंस जयंती, फुलैरा दूज,दि. 3- विनायक चतुर्थी व्रत,दि. 7- होलाष्टक प्रा., दुर्गाष्टमी,दि. 10-आमला 11 व्रत, मेला खाटू श्यामजी 2 दिन का, रामस्नेही सम्प्रदाय का फूलडोल महोत्सव,दि. 11- गोविन्द द्वादशी, प्रदोष व्रत,दि. 13- होलिका दहन, सत्यव्रत,दि. 14- श्री चैतन्य महाप्रभु ज., धुलेंडी, होलाष्टक समाप्त, संक्रांति पु.,दि. 15- वसंतोत्सव, होला मेला आनन्दपुर साहिब,दि. 17- श्री गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 19- रंग पंचमी, मेला नवचण्डी मेरठ,दि.20- एकनाथ षष्ठी,दि. 21- शीतला सप्तमी,दि.22- शीतलाष्टमी (बसौड़ा), मेला केसरिया (मेवाड़), कैलादेवी, कालाष्टमी,दि.25- पापमोचिनी एकादशी व्रत,दि.27- प्रदोष व्रत, महावारुणी पर्व, मास शिवरात्रि,दि.29- मेला प्रथूदक पिहोवा (हरि.), शनैश्चरी अमावस्या,दि. 30- नवरात्र प्रारम्भ, संवत् 2082 प्रारम्भ,दि. 31- सिंधारा, मत्स्य जयंती, गणगौरी तीज

 मूल विचार मार्च -2025 

मूल विचार-दि. 2 को 8/59 से दि.4 को 4/29 तक, दि.13 को 4/05 तक, दि.20 को 23/31 से दि.11 को 00/51 से दि.23 को 3/23 तक, दि.29 को 19/26 से दि.31 को 13/45 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।

ग्रह स्थिति मार्च -2025

ग्रह स्थिति-दि. 2 शुक्र वक्री,दि. 14 सूर्य मीन में,दि. 15 बुध वक्री,दि. 18 बुध पश्चिमास्त,दि. 19 शुक्र पश्चिमास्त,दि. 22 शुक्रोदय पूर्व,दि. 29 शनि मीन में

पंचक विचार मार्च  -2025  

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा  पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है पंचक विचार- मासारंभ से दि. 3 को 6/38 तक, दि. 26 को 15/14 से दि. 30 को 16/34 बजे तक पंचक हैं।

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भद्रा विचार मार्च -2025

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार - भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |

दि. 3 को 7/30 से 18/02 तक, दि. 6 को 10/51 से 22/04 तक, दि. 9 को 19/45 से दि. 10 को 7/44 तक, दि. 13 को 10/36 से 23/30 तक, दि. 17 को 6/15 से 19/33 तक, दि. 21 को 2/45 से 15/39 तक, दि. 24 को 17/27 से दि. 25 को 5/05 तक, दि. 27 को 23/03 से दि. 28 को 9/32 बजे तक भद्रा है।

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सर्वार्थ सिद्धि योग मार्च -2025  

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

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दिनांक

प्रारंभ

दिनांक

समाप्त

02

06-49

02

08-59

05

02-37

06

06-45

09

23-55

11 

00-51

11

06-39

12

02-15

16

06-34

16

11-45

19

20-59

20

23-31

24

04-18

24

06-24

25

04-26

25

06-23

30

16-34

31

06-16


चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त देखकर कार्य या यात्रा करना उत्तम होता है। एक तिथि के लिये दिवस और रात्रि के आठ-आठ भाग का एक चौघड़िया निश्चित है। इस प्रकार से 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात मानें तो प्रत्येक में 90 मिनट यानि 1.30 घण्टे का एक चौघड़िया होता है जो सूर्योदय से प्रारंभ होता है|

सुर्य उदय- सुर्य अस्त मार्च -2025 

सूर्य उदय - दि. 1-6/50, दि. 5-6/46, दि. 10-6/40, दि. 15-6/35, दि. 20- 6/29, दि. 25-6/23,   सूर्य अस्त -  दि.1-18/17, दि.5-18/20, दि. 10-18/23, दि. 15-18/26, दि. 20-18/29, दि. 25-18/31, दि. 30-18/35,दि. 30- 6/17 

 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |

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  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।




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सोमवार, 24 फ़रवरी 2025

महारानी अहिल्याबाई होलकर

  महारानी अहिल्याबाई होलकर

भारत का अपना एक समृद्धशाली इतिहास रहा है | संस्कृति और परंपराओं का देश भारत हमेशा से ही दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां की विविधताओं की वजह से दुनिया भर से लोग यहां खींचे चले आते हैं। यहां कई शासकों ने शासन किया, तो वहीं यहां कई लड़ाइयां भी लड़ी गईं। इसके अलावा भारत के इतिहास के पन्नों में कई ऐसी रानियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने पराक्रम और दृढ़ निश्चय से विरोधियों को कड़ी टक्कर दे हराया है । रानी अहिल्याबाई उन्ही वीरांगनाओ में से एक थीं, उनका नाम लोग सम्मान सहित याद करते है ।अहिल्याबाई होलकर भारत माता की वह बेटी थी जिसने 275 साल पहले ही कुरीतियों की बेड़ियों को तोड़ व उन्हे समाप्त करने का प्रयास किया । राज्य मे संकट के समय जब जरूरत पड़ी तो अपनी प्रजा के लिए घोड़े पर सवार होकर खड़ग हाथ मे लिए जंग भी लड़ी। धर्म का संदेश फैलाया,मंदिरों का निर्माण किया , संस्कृति संरक्षण, बालिका शिक्षा, महिला अधिकारों और औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया।

होलकर साम्राज्य की महारानी होलकर भारतीय इतिहास की कुशल महिला शासकों में से एक रही हैं। इनका जन्म 31 मई, 1725 को हुआ था और 13 अगस्त, 1795 को निधन हो गया था। महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के जामखेड के नजदीक चोंडी गांव में जन्म लेने वाली अहिल्याबाई का शुरुआती जीवन बड़ी कठिनाईयों से गुजरा।

भारत के मालवा साम्राज्य की मराठा अहिल्याबाई होलकर महारानी थीं | उनके पिता मंकोजी राव शिंदे, अपने गाव के पाटिल थे. उस समय महिलाये स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने उन्हें लिखने -पढ़ने लायक पढ़ाया | रानी न्याय करते समय अपने पराये में जरा भी भेद नहीं करती थी | व्यक्ति से लेकर पशुओं तक के दर्द को समझती थी | एक बार क्रूरता के मामले में बेटे के दोषी पाये जाने पर अहिल्याबाई होलकर बेटे को रथ के नीचे कुचलकर मारने के लिए निकल गई |

रानी अहिल्याबाई का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के मन में मालवा का ख्याल आता है, लेकिन अहिल्याबाई की शख्सियत और इतिहास इससे कही बड़ा है। वह मध्यप्रदेश के महेश्वर की कर्ता-धर्ता ही नहीं, बल्कि होल्कर साम्राज्य का एक अहम हिस्सा भी थीं। उन्हें न सिर्फ मालवा की रक्षा करने के लिए जाना जाता है | महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कई सारे सामाजिक कार्य करे इसलिए भी उन्हें आज तक बढ़े सम्मान के साथ याद किया जाता है।

मध्यप्रदेश के मालवा से अहिल्याबाई के संबंध के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन बेहद कम लोग ही यह जानते होंगे कि अहिल्याबाई का महाराष्ट्र के अहमदनगर से गहरा संबंध रहा है। अहिल्याबाई की शादी प्रसिद्ध सूबेदार मल्हार राव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुई थी। वह भारत के मालवा साम्राज्य की मराठा होल्कर महारानी थीं। अहिल्याबाई के पति खंडेराव होल्कर की 1754 में कुंभ्बेर युद्ध में मौत हो गई थी।अहिल्याबाई होलकर पति की मृत्यु के बाद सती होना कहती थी पर उन्हे ईसा करने के लिए उनके ससुर ने रोका पर इसके 12 साल बाद उनके ससुर मल्हार राव होल्कर की भी मौत हो गई। इसके एक साल बाद अहिल्याबाई को मालवा साम्राज्य की महारानी घोषित किया गया। अपने शासनकाल के दौरान रानी अहिल्याबाई ने साम्राज्य महेश्वर और इंदौर में कई मंदिरों का निर्माण कराया था। साथ ही उन्होंने लोगों के लिए कई सारी धर्मशालाएं बनवाईं, जो मुख्य रूप से तीर्थ स्थानों जैसे द्वारका, काशी विश्वनाथ, वाराणसी का गंगा घाट, उज्जैन, नाशिक विष्णुपद मंदिर और बैजनाथ के आसपास मौजूद हैं। इसके अलावा उन्होंने औरंगजेब द्वारा तोड़े गए कई मंदिरों का दोबारा निर्माण भी करवाया। अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने पूरे भारत में श्रीनगर, हरिद्वार, केदारनाथ, बदरीनाथ, प्रयाग, वाराणसी, नैमिषारण्य, पुरी, रामेश्वरम, सोमनाथ, महाबलेश्वर, पुणे, इंदौर, उडुपी, गोकर्ण, काठमांडू आदि में बहुत से मंदिर बनवाए।

महाराष्ट्र के एक शहर अहमदनगर का नाम अहिल्या बाई नगर करने का एलान किया गया है। तो वहीं देश भर मे अनेकों कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम महारानी अहिल्याबाई होलकर हैं।


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सोमवार, 17 फ़रवरी 2025

रूद्राक्ष कैसे धारण करें।

 


रुद्राक्ष 

किस धारणा से कौन सा रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। रूद्राक्ष कैसे धारण करें।

एकमुखी रूद्राक्ष ('एक वक्त्र: शिव: साक्षाद्र ब्रहमहत्या त्योपहति`) एक मुखी रूद्राक्ष को साक्षात् भगवान शिव माना गया है। इस में स्वयं शिव ही विराजते हैं।

द्विमुखी रूद्राक्ष (गृह सुख शान्तिदाता) यह मुक्ति एवं सांसारिक ऐश्वर्य का दाता है तथा अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है यह स्त्रियों के लिए विशेषकर लाभदायक है।

त्रिमुखी रूद्राक्ष (बुखार से छुटकारा) इसके धारक से अग्निदेव प्रसन्न होते है। जिस व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है उसके लिए विशेष गुणकारी है।

चर्तुमुखी रूद्राक्ष (ज्ञान-वाकपटुता) यह साक्षात् ब्रहमा जी का स्वरूप् है। जिस बालक की बुद्धि कमजोर हो, बोलने में अटकता हो उसके लिए अति उत्तम है।

पंचमुखी रूद्राक्ष (दिल की बीमारी के लिए) इसको धारण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं यह प्रचण्ड कालाग्नि रूद्र है। इसके धारक को किसी प्रकार का दुख नहीं सताता, इसके कम से कम तीन दाने धारण करने चाहिए।

छ: मुखी रूद्राक्ष (विद्या प्राप्ति के लिए) यह रूदाक्ष स्वामी कार्तिकेय के समान है। यह विद्या प्राप्ति में तथा ब्रहम हत्यादि के दोष दूर करने में सहायक है।

सप्तमुखी रूद्राक्ष (धन प्राप्ति के लिए) इस रूद्राक्ष के देवता सात माताएं, सूर्य और सप्तऋषि हैं। इसके धारक पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।

अष्टमुखी रूद्राक्ष (आयु वृद्धि के लिए) यह रूद्राक्ष गणेश जी का स्वरूप है वटुक भैरव का स्वरूप माना जाता है। यह आयु बढ़ाने वाला है।

नवमुखी रूद्राक्ष (नवदुर्गा रूप) यह रूद्राक्ष भगवती दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। किसी मत के अनुसार इसे धर्मराज का स्वरूप माना गया है।

दशमुखी रूद्राक्ष (ग्रह शन्ति के लिए) इस रूद्राक्ष के प्रधान भगवान जनार्दन एवं दसों दिगपाल कहे गये हैं। इसके धारक के सर्व कार्य सिद्ध होते है।

एकादशमुखी रूद्राक्ष (पुत्र प्राप्ति के लिए) स्त्रियों के लिए यह रूद्राक्ष सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। पति की सुरक्षा उसकी दीर्धायु एवं उन्नति तथा सौभाग्य प्राप्ति में यह रूद्राक्ष उपयोगी है।

द्वादशमुखी रूद्राक्ष (विष्णु स्वरूप) यह रूद्राक्ष भगवान विष्णु स्वरूप सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसके देवता बारह सूर्य है। इसको धारण करने से सभी रोग दूर हो जाते हैं तथा लोक परलोक में सुख की प्राप्ति होती है।

तेरहमुखी रूद्राक्ष (मनोकामना सिद्धि) यह रूद्राक्ष हर प्रकार की मनोकामना सिद्ध करने वाला है। इसके धारण से यश, मान, एवं धन की प्राप्ति होती है।

चौदहमुखी रूद्राक्ष (सर्व सुखकारी) यह रूद्राक्ष स्वयं भगवान शिव के नेत्र से प्रकट हुआ है ऐसा कई ग्रन्थों में लिखा है। इसे पूज्य हनुमान जी का स्वरूप माना गया है यह सौभाग्य से ही प्राप्त होता है।

गौरी-शंकर रूद्राक्ष (शिव शक्ति मिश्रित रूप) यह रूद्राक्ष कुदरती दो जुडे हुए रूद्राक्ष होते हैं इसलिए इस रूद्राक्ष को शिव तथा शक्ति का मिश्रित रूप माना गया है जो व्यक्ति एकमुखी प्राप्त करने में असमर्थ हो उनके लिए यह रूद्राक्ष अति उत्तम है। घर में, पूजा घर में, तिजोरी में मंगलकामना की सिद्धि के लिए इसे रखना आवश्यक है।

नोट : प्रत्येक रूद्राक्ष को सदैव सोमवार के दिन प्रात:काल शिव मन्दिर में बैठकर गंगाजल या कच्चे दूध में धो कर धारण करें। रूदाक्ष को लाल धागे में अथवा सोने या चांदी के तार में पिरो कर धारण किया जा सकता है।

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संसदीय संस्कृत परिषद

 


नमो नमः। संसदीय संस्कृत परिषद के माध्यम से देश में संसद,विधानसभा एवं निकाय चुनावों में विजयी हुए नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि देववाणी संस्कृत में शपथ लें,ये सोच 80 के दशक के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख पूज्य मोरोपंत पिंगले जी,विहिप नेता अशोक सिंहल जी एवं महंत अवैद्यनाथ जी ने धरातल पर उतारने का निश्चय किया था। संसदीय संस्कृत परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय रामावतार धानुका जी और महासचिव डॉ.जीतराम भट्ट जी ने अथक परिश्रम से इस परंपरा को मिशन बनाकर आगे बढ़ाया। 1994 के बाद से इस अभियान में इन महानुभावों के साथ भारत संस्कृत परिषद Bharat Sanskrit Parishad भी सक्रिय हुई। डॉ.डी.बी.डेग्वेकर,के.का.शास्त्री,आचार्य रामनाथ सुमन,आचार्य राधाकृष्ण मनोड़ी और प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी के साथ गिलहरी वाली भूमिका में हम सबने इसे देशव्यापी बनाने का अभियान चलाया। 2000 के बाद अस्तित्व में आई संस्कृत भारती Samskrita Bharati ने भी संस्कृत शपथ के इस अभियान से जुड़कर इसे देशव्यापी बनाने में सहायता की। विहिप की ओर से पूज्य अशोक जी के बाद श्री चंपत राय Champat Rai जी ने इस अभियान को गतिमान बनाए रखा। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीते सभी विधायकों से ही नहीं राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध जनता से संसदीय संस्कृत परिषद Sansadiya Sanskrit Parishad यही आग्रह कर रही है कि आप लोग भी अपने स्तर पर अपने प्रतिनिधियों को संस्कृत भाषा में शपथ लेने को प्रेरित करें। ताकि आपका प्रतिनिधि उस शपथ से अपने दायित्व में नैतिकता,ईमानदारी,जनसेवा और जिम्मेदारी की भावना को बचाए रखे। शपथ का नमूना इस पत्र में अंकित है। शुभम् भवेत्।

रविवार, 16 फ़रवरी 2025

भारत को जाने, हमारी प्राचीन विरासत

 


भारत को जाने, हमारी प्राचीन विरासत 

सतीश शर्मा 

पृथ्वी के सतह के किसी भाग के स्थानों, नगरों, देशों, पर्वत, नदी आदि की स्थिति को पैमाने की सहायता से कागज पर लघु रूप में बनाना मानचित्रण कहलाता हैं। मानचित्र दो शब्दों मान और चित्र से मिल कर बना है जिसका अर्थ किसी माप या मूल्य को चित्र द्वारा प्रदर्शित करना है।

भारत की पारम्परिक सीमा "त्रिविष्टप" (तिब्बत) भारत के उत्तर में रही है। कैलाश मानसरोवर, गान्धार, कश्यप-सागर (कैस्पियन सागर), बर्मा (ब्रह्मदेश), श्रीलंका, ईरान (आर्यान), अफगानिस्तान (उप गणस्थान) आदि भारत के अंग रहे हैं।

वृहत्तर भारत की सीमाएं- दक्षिण में हिन्दु महासागर और पूर्व में ब्रह्मदेश, श्याम, काम्बोज, द्वारावती (सुमात्रा), स्वर्ण दीप (बोर्नियो), सिंह द्वीप आदि । हिन्दु एशिया (इण्डोनेशिया) पश्चिम में यूनान तक महाभारत का विस्तार । समस्त पृथ्वी पर चक्रवर्तियों का शासन (धर्मानुशासन)। महाभारत के युद्ध (जनमेजय) के बाद चक्रवर्ती प्रथा समाप्त। भारत की सीमायें क्रमश: संकुचित । बुद्ध के पश्चात् सैनिक तैयारियाँ और जागरुकता भी बन्द । चन्द्रगुप्त मौर्य को फिर से दहेज में गान्धार मिला परन्तु अरब आक्रमण के बाद गान्धार अफगानिस्तान बना। अँग्रेजों के ‘भारत-साम्राज्य' में बलोचिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, बर्मा (ब्रह्मदेश) और मलाया का एक भाग भारत का ही अंग माना जाता था।

 भारत से टूटकर बने है यह 15 देश , इतिहास जानिए:-

भारत को पहले अखण्ड भारत कहते थे | क्यूंकि भारत पुरे विश्व में बहुत बड़ा था | समय के साथ यहाँ के बटवारे होते गए | आपको यह जानकर हैरानी होगी | भारत से ही 15 देशों का जन्म हुआ |

यह कैसे हुआ | यह 15 देश कौन से है | यह जानिए --

ईरान : जब भारत से आर्यन ईरान में बलुचिस्थान में पहुंचे | तब वहाँ बस गए | उसी से इसका नाम इरयाना पड़ा |उसके बाद अरबो ने यहाँ आक्रमण किया | साथ ही यह बस गए | तब इसका नाम ईरान पड़ा।

कम्बोडिया : प्रथम शताब्दी में कम्बोडि नामक भरतीय ब्राह्मण ने इस देश में हिन्दू राज की स्थापना की | इसी से इसका नाम कम्बोडिया पड़ा| बाद में यह स्वतंत्र देश हो गया।

वियतनाम : इस देश का नाम पहले चम्पा था | यह भारत का एक अंग था | 1825 में चम्पा में हिन्दुराज समाप्त हुआ | यह एक अलग देश बना।

मलेशिया : यहाँ बोध धर्म भारतीयों ने स्थापित किया | यह देश भारतीय संस्कृति के लिए मशहूर था | 1948 में अंग्रेजों से आजाद होकर यह अलग देश बना।

इंडोनेशिया : यह भारत का संपन्न देश था | यहाँ हिन्दू कम रह गए | फिर यह एक अलग मुस्लिम देश बना | परन्तु यहाँ आज भी राम मंदिर है | जहाँ मुस्लिम पूजा करते है।

फिलिपींस : मुसलमानो ने आक्रमण कर यहाँ अपना राज जमा लिया । फिर यह अलग देश बना ,परन्तु आज भी यहाँ हिन्दू रीती रिवाज अपनाये जाते है।

अफगानिस्तान : यह भारत का एक अंग था । यहाँ हिंदू राजा अम्बी का राज था | जिसने सिकंदर से संधि कर उसे यह राज्य दिया था | महाभारत के शकुनि और गंधारी यहाँ कन्दरि के थे | इस्लाम के बाद यह भारत से सांस्कृतिक रूप से भी अलग देश बन गया ।1876

नेपाल : यह भारत का एक अंग था | इसका एकीकरण एक गोरखे ने किया | महात्मा बुद्ध यही राजवंश के थे |1904

भूटान : यह पहले भारत के भद्रदेश से जाना जाता था | हमारे ग्रंथो में इस देश का उल्लेख है | 1906 में इसे एक संपन्न राज्य घोषित कर दिया।

तिब्बत : हमारे ग्रंथो में त्रिविशिस्ट के नाम से इसका नाम है | भारतीय शासको को हराकर चीन ने इसे अपने में मिला लिया।1914

श्रीलंका : इसका नाम ताम्रपानी था | पहले पुर्तगाली , फिर अंग्रेजो ने यहाँ अधिकार किया | 1937 में अंग्रेजो ने इसे भारत से अलग कर दिया।

म्यांमार : इसका पहले नाम बर्मा था | यहाँ का प्रथम राजा वाराणसी का राजकुमार था | 1852 में अंग्रेजो ने यह अधिकार किया | 1937 में इसे भारत से अलग कर दिया।

पाकिस्तान : यहाँ आज़ादी के बाद बहुत से हिन्दू मंदिर तोड़ दिए गए थे | सभी जानते है | यह भारत से अलग हुआ देश है।1947

बांग्लादेश : यह देश भी 15 अगस्त से पहले भारत का अंग था | फिर यह पूर्वी पाकिस्तान का अंग बना | 1971 में भारतीय फ़ौज ने इसे पाकिस्तान से अलग कराया |

थाईलैंड : इसका प्राचीन भारतीय नाम श्यामदेश था | पहले यहाँ हिन्दू राजस्व था | बाद में यहाँ बोध प्रचार हुआ। |[

 मुख्य शहर 

काशी ,कांची ,आव्न्तिका ,वैशाली ,गया ,जगन्नाथ पुरी ,विजय नगर ,पाटलिपुत्र ,प्रयागराज,अम्रतसर ,सोमनाथ ,तक्षशिला, ,द्वरिका ,इन्द्रप्रस्थ,हरिद्वार,अयोध्या,मथुरा-वृंदावन,नासिक,चित्रकूट,रामेश्वरम 

मुख्य नगर स्थान 

अयोध्या- मान्यता है कि इस नगर को मनु ने बसाया था और इसे 'अयोध्या' का नाम दिया जिसका अर्थ होता है अ-योध्या अर्थात् 'जिसे युद्ध के द्वारा प्राप्त न किया जा सके। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ७वीं शताब्दी में यहाँ आया था। उसके अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहते थे। यह नगरी सप्त पुरियों में से एक है-

द्वारका - भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर और नगरपालिका है। द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है। यह हिन्दुओं के चारधाम में से एक है और सप्तपुरी में से भी एक है। यह श्रीकृष्ण के प्राचीन राज्य द्वारका का स्थल है और गुजरात की सर्वप्रथम राजधानी माना जाता है।

काशी - विश्व के सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में काशी का उल्लेख मिलता है - 'काशिरित्ते.. आप इवकाशिनासंगृभीता:'। पुराणों के अनुसार यह आद्य वैष्णव स्थान है। पहले यह भगवान विष्णु (माधव) की पुरी थी। जहां श्रीहरिके आनंदाश्रु गिरे थे, वहां बिंदुसरोवर बन गया और प्रभु यहां बिंधुमाधव के नाम से प्रतिष्ठित हुए। ऐसी एक कथा है कि जब भगवान शंकर ने क्रुद्ध होकर ब्रह्माजी का पांचवां सिर काट दिया, तो वह उनके करतल से चिपक गया। बारह वर्षों तक अनेक तीर्थों में भ्रमण करने पर भी वह सिर उन से अलग नहीं हुआ। किंतु जैसे ही उन्होंने काशी की सीमा में प्रवेश किया, ब्रह्महत्या ने उनका पीछा छोड़ दिया और वह कपाल भी अलग हो गया। जहां यह घटना घटी, वह स्थान कपालमोचन-तीर्थ कहलाया। महादेव को काशी इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने इस पावन पुरी को विष्णुजी से अपने नित्य आवास के लिए मांग लिया। तब से काशी उनका निवास-स्थान बन गया।

कांची पल्लवों की राजधानी थी, जिन्होंने उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर दक्षिण में कावेरी नदी तक फैले क्षेत्र पर शासन किया था। पल्लवों ने शहर को प्राचीर, खंदक आदि से किलेबंद किया, जिसमें चौड़ी और अच्छी सड़कें और सुंदर मंदिर थे।

 उज्जैन- स्कन्द पुराण के 28वें अध्याय में उल्लेख है कि इस नगर के अधिष्ठाता देव महादेव ने त्रिपुरी के शक्तिशाली राक्षस अंधकासुर को पराजित कर विजय प्राप्त की। अतः स्मृति स्वरूप उज्जयिनी नाम रखा गया। उज्जयिनी अवन्ति जनपद की महत्वपूर्ण नगरी थी; जो कालान्तर में राजधानी बन गई। इसी कारण अवन्तिका अवन्तिपुरी के नाम से विख्यात हो गई।(उज्जैन)

हरिद्वार - उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। यह नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित है। यह बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। 3139 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से 253 किमी की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को 'गंगाद्वार' के नाम से भी जाना जाता है; जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। हरिद्वार का अर्थ "हरि (ईश्वर) का द्वार" होता है।

मथुरा - भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा ज़िले में स्थित एक नगर है। मथुरा ऐतिहासिक रूप से कुषाण राजवंश द्वारा राजधानी के रूप में विकसित नगर है। उससे पूर्व भगवान कृष्ण के समय काल से भी पूर्व अर्थात लगभग 7500 वर्ष से यह नगर अस्तित्व में है.यह धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मथुरा भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म, दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, चैतन्य महाप्रभु आदि से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है

रामेश्वरम - जिसे तमिल लहजे में "इरोमेस्वरम" भी कहा जाता है, भारत के तमिल नाडु राज्य के रामनाथपुरम ज़िले में एक तीर्थ नगर है, जो हिन्दू धर्म के पवित्रतम चार धाम तीर्थस्थलों में से एक है। यह रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है, जो भारत की मुख्यभूमि से पाम्बन जलसन्धि द्वारा अलग है और श्रीलंका के मन्नार द्वीप से 40 किमी दूर है। भौगोलिक रूप से यह मन्नार की खाड़ी पर स्थित है। चेन्नई और मदुरई से रेल इसे पाम्बन पुल द्वारा मुख्यभूमि से जोड़ती है। रामायण की घटनाओं में रामेश्वरम की बड़ी भूमिका है। यहाँ श्रीराम ने भारत से लंका तक का राम सेतु निर्माण करा था, ताकि सीता की सहायता के लिए रावण के विरुद्ध आक्रमण करा जा सके। यहाँ श्रीराम ने शिव की उपासना करी थी और आज नार के केन्द्र में खड़ा शिव मन्दिर उशी घटनाक्रम से समबन्धित है। नगर और मन्दिर दोनों शिव व विष्णु भक्तों के लिए श्रद्धा-केन्द्र हैं।

नासिक - या नाशिक भारत के महाराष्ट्र राज्य के नाशिक ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय और महाराष्ट्र का चौथा सबसे बड़ा नगर है। नाशिक गोदावरी नदी के किनारे बसा हुआ है। यह महाराष्ट्र के उत्तर पश्चिम में, मुम्बई से 150 किमी और पुणे से 205 किमी की दुरी में स्थित है। यह शहर प्रमुख रूप से हिन्दू तीर्थयात्रियों का प्रमुख केन्द्र है। इस शहर का सबसे प्रमुख भाग पंचवटी है। इसके अलावा यहां बहुत से मंदिर भी है। नाशिक में त्योहारों के समय में बहुत अधिक संख्या में भीड़ दिखाई पड़ती है।

जगन्नाथ पुरी - भारत के ओड़िशा राज्य के पुरी ज़िले में बंगाल की खाड़ी से तटस्थ एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। पुरी भारत के चार धाम में से एक है और यहाँ 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मन्दिर स्थित होने के कारण इसे श्री जगन्नाथ धाम भी कहा जाता है।

प्रयागराज - जिसका भूतपूर्व नाम इलाहाबाद था, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख नगर है। यह प्रयागराज ज़िले का मुख्यालय है और हिन्दूओं का एक मुख्य तीर्थस्थल है। इसका प्राचीन नाम प्रयाग था। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है।

पाटलिपुत्र- बिहार की राजधानी पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र,कुसुमपुर,पुष्पपुरी और अजिमावाद था। पवित्र गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसे इस शहर को लगभग 2000 वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इसी नाम से अब पटना में एक रेलवे स्टेशन भी है। पाटलिपुत्र अथवा पाटलिपुत्र प्राचीन समय से ही भारत के प्रमुख नगरों में गिना जाता था। पाटलिपुत्र वर्तमान में पटना को ही कहा जाता हैं। इतिहास के अनुसार, सम्राट अजातशत्रु के उत्तराधिकारी उदयिन ने अपनी राजधानी को राजगृह से पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया और बाद में चन्द्रगुप्त मौर्य ने यहां साम्राज्य स्थापित कर अपनी राजधानी बनाई। बाद में, शेर शाह सूरी (1538-1545) ने पाटलिपुत्र को पुनर्जीवित किया,[4] जो 7 वीं शताब्दी सीई के बाद से गिरावट में था, और इसका नाम पटना रखा।

अमृतसर - जिसका ऐतिहासिक नाम रामदासपुर और जिसे आम बोलचाल में अम्बरसर कहा जाता है, भारत के पंजाब राज्य का (लुधियाना के बाद) दूसरा सबसे बड़ा नगर है और अमृतसर ज़िले का मुख्यालय है। यह पंजाब के माझा क्षेत्र में है और एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, धार्मिक, यातायात और आर्थिक केन्द्र है। यह सिख धर्म का सबसे पवित्र नगर है और यहाँ सबसे बड़ा गुरद्वारा, स्वर्ण मंदिर, स्थित है। स्वर्ण मंदिर अमृतसर का हृदय माना जाता है। यह गुरू रामदास का डेरा हुआ करता था। अमृतसर चण्डीगढ़ से 217 किमी 

कांची - कांचीपुरम उत्तरी तमिलनाडु के प्राचीन व मशहूर शहरों में से एक है। कांचीपुरम को दक्षिण की काशी भी कहा जाता है। यह मद्रास से 45 मील की दूरी पर दक्षिण–पश्चिम में स्थित है। कांचीपुरम को पूर्व में कांची कहा जाता था और अब यह कांचीवरम के नाम से भी प्रसिद्ध है। कांचीपुरम को भारत के सात पवित्र शहरों में से एक का दर्जा मिला हुआ है। इसलिए यहाँ साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

तक्षशिला - वर्तमान समय में तक्षशिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील तथा महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो इस्लामाबाद और रावलपिण्डी से लगभग 32 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है

इंद्रप्रस्थ - को केवल महाभारत से ही नहीं जाना जाता है। पाली -भाषा के बौद्ध ग्रंथों में इसका उल्लेख इंद्रपट्ट या इंद्रपट्टन के रूप में भी किया गया है, जहां इसे कुरु साम्राज्य की राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है, जो यमुना नदी पर स्थित है। बौद्ध साहित्य में हथिनीपुरा (हस्तिनापुर) और कुरु साम्राज्य के कई छोटे शहरों और गांवों का भी उल्लेख है। इंद्रप्रस्थ ग्रीको-रोमन दुनिया के लिए भी जाना जा सकता है ऐसा माना जाता है कि दूसरी शताब्दी सीई से टॉलेमी के भूगोल में इसका उल्लेख "इंदबारा" शहर के रूप में किया गया है, जो संभवतः प्राकृत से लिया गया है।"इंदबत्ता" के रूप में, और जो शायद दिल्ली के आसपास के क्षेत्र में था। उपिंदर सिंह (2004) इंद्रप्रस्थ के साथ इंदबारा के इस समीकरण को प्रशंसनीय बताते हैं। नई दिल्ली के रायसीना क्षेत्र में खोजे गए 1327 सीई के एक संस्कृत शिलालेख में इंद्रप्रस्थ को दिल्ली क्षेत्र के एक प्रतिगण (जिला) के रूप में भी नामित किया गया है।

सोमनाथ - गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बन्दरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है। यह मन्दिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है।

चित्रकूट धाम - भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के चित्रकूट जिले में स्थित एक शहर है। यह उस जिले का मुख्यालय भी है। यह बुन्देलखण्ड क्षेत्र मे स्थित है और बहुत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व रखता है। चित्रकूट भगवान राम की कर्म भूमि है। भगवान राम ने वनवास के 11 वर्ष चित्रकूट मे बिताये थे।

गया - भारत के बिहार राज्य के गया ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय और बिहार राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इस क्षेत्र के लोग मगही भाषा बोलते हैं और गया भारत के अतंरराष्ट्रीय पर्यटक स्थलों मे से एक हैं यहाँ पर विदेशी पर्यटकों लाखों की संख्या मे आते हैंइस नगर का हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्मों में गहरा ऐतिहासिक महत्व है। शहर का उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। गया तीन ओर से छोटी व पत्थरीली पहाड़ियों से घिरा है, जिनके नाम मंगला-गौरी, श्रृंग स्थान, रामशिला और ब्रह्मयोनि हैं। नगर के पूर्व में फल्गू नदी बहती है

वैशाली - दुनिया में पहली गणराज्य होने का विश्वास, वैशाली ने महाभारत काल के राजा विशाल से अपना नाम लिया है। कहा जाता है कि वह यहां एक महान किला का निर्माण कर रहा है, जो अब खंडहर में है। वैशाली एक महान बौद्ध तीर्थ है और भगवान महावीर के जन्मस्थान भी है। ऐसा कहा जाता है कि बुद्ध ने तीन बार इस जगह का दौरा किया और यहां काफी समय बिताया। बुद्ध ने वैशाली में अपना आखिरी प्रवचन भी दिया और यहां अपने निर्वाण की घोषणा की। उनकी मृत्यु के बाद, वैशाली ने दूसरी बौद्ध परिषद भी आयोजित की।

मुख्य नदी - 

गंगा ,गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई उत्तराखंड में हिमालय के गंगोत्री हिमनद के गोमुख स्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक भारत की मुख्य नदी के रूप में विशाल भू-भाग को सींचती है।

यमुना-यमुना भारत की एक नदी है। यह गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो यमुनोत्री नामक जगह से निकलती है और प्रयाग में गंगा से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में चम्बल, सेंगर, छोटी सिन्धु, बेतवा और केन उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में दिल्ली और आगरा के अतिरिक्त इटावा, कालपी, हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। ,

सरस्वती यह सिंधु घाटी सभ्यता से पहले की संस्कृति है और सिंधु घाटी सभ्यता में भी जारी रही. ऐसा अनुमान है कि 900 BC में सरस्वती सूखने लगी. यह नदी आदिबद्री (देहरादून के नजदीक) और राजस्थान, गुजरात से बहते हुए अरब सागर में जाकर गिरती थीइसे प्लाक्ष्वती, वेद्समृति, वेदवती भी कहते है! ऋग्वेदमें सरस्वती का अन्नवती तथा उदकवती के रूप में वर्णन आया है। यह नदी सर्वदा जल से भरी रहती थी और इसके किनारे अन्न की प्रचुर उत्पत्ति होती थी।

,सिधु-सिन्धु नदी एशिया की सबसे लम्बी नदियों में से एक है। यह पाकिस्तान, भारत और चीन के माध्यम से बहती है। सिन्धु नदी का उद्गम स्थल, तिब्बत के मानसरोवर के निकट सिन-का-बाब नामक जलधारा माना जाता है। इस नदी की लम्बाई प्रायः 3610 किलोमीटर है। यहाँ से यह नदी तिब्बत और कश्मीर के बीच बहती है

ब्रहमपुत्र - ब्रह्मपुत्र भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। यह तिब्बत, भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। ब्रह्मपुत्र का उद्गम हिमालय के उत्तर में तिब्बत के पुरंग जिले में स्थित मानसरोवर झील के निकट होता है, जहाँ इसे यरलुङ त्सङ्पो कहा जाता है। तिब्बत में बहते हुए यह नदी भारत के अरुणांचल प्रदेश राज्य में प्रवेश करती है।2,900 km,

गण्डकी - गण्डकी नदी, नेपाल और बिहार में बहने वाली एक नदी है जिसे बड़ी गंडक या केवल गंडक भी कहा जाता है। इस नदी को नेपाल में सालिग्रामि या सालग्रामी और मैदानों मे नारायणी और सप्तगण्डकी कहते हैं। यूनानी के भूगोलवेत्ताओं की कोंडोचेट्स तथा महाकाव्यों में उल्लिखित सदानीरा भी यही है।८१४ ,

कावेरी - कावेरी कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहनेवाली एक सदानीरा नदी है। यह पश्चिमी घाट के पर्वत ब्रह्मगिरीसे निकली है। इसकी लम्बाई प्रायः 760 किलोमीटर है। दक्षिण पूर्व में प्रवाहित होकर कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिली है। सिमसा, हेमावती, भवानी इसकी उपनदियाँ है।,

महानदी - छत्तीसगढ़ तथा ओड़िशा अंचल की सबसे बड़ी नदी है। प्राचीनकाल में महानदी का नाम चित्रोत्पला था। महानन्दा एवं नीलोत्पला भी महानदी के ही नाम हैं। महानदी का उद्गम रायपुर के समीप धमतरी जिले में स्थित सिहावा नामक पर्वत श्रेणी से हुआ है। महानदी का प्रवाह दक्षिण से उत्तर की तरफ है। ,

रेवा-नर्मदा नदी - जिसे स्थानीय रूप से कही-कही रेवा नदी भी कहा जाता है, भारत के 5वीं सबसे लम्बी नदी और पश्चिम-दिशा में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है। यह मध्य प्रदेश राज्य की भी सबसे बड़ी नदी है। नर्मदा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में बहती है।१३१२ ,

गोदा,गोदावरी नदी - भारत के प्रायद्वीपीय भाग की एक प्रमुख नदी है। यह नदी दूसरी प्रायद्वीपीय नदियों में से सबसे बड़ी नदी है। इसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति पश्चिमी घाट में त्रयंबक पहाड़ी से हुई है। यह महाराष्ट्र में नाशिक ज़िले से निकलती है। इसकी लम्बाई प्रायः 1465 किलोमीटर है। इस नदी का पाट बहुत बड़ा है।

मुख्य पर्वत -

हिमालय,महेंद्र पर्वत उड़ीसा, मलयगिरि पर्वत मैसूर, सह्याद्रि पर्वत पश्चिमी घाट, रैवतक सौराष्ट्र मे गिरनार, विंध्यांचल तथा अरावली राजस्थान 

मुख्य सरोवर पञ्च सरोवर 

१. पम्पा सरोवर (कर्नाटक), २. मानसरोवर (तिब्बत). ३. पुष्कर सरोवर (राजस्थान), ४. बिन्दु सरोवर (गुजरात), ५. नारायण सरोवर (गुजरात)। 

चार मठ 

हिंदू धर्म का संत समाज शंकराचार्य द्वारा नियुक्त चार मठों के अधीन है। हिंदू धर्म की एकजुटता और व्यवस्था के लिए चार मठों की परंपरा को जानना आवश्यक है।

चार मठों से ही गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता है। चार मठों के संतों को छोड़कर अन्य किसी को गुरु बनाना हिंदू संत धारा के अंतर्गत नहीं आता।

आदिशंकराचार्यजी ने जो चारपीठ स्थापित किये,उनके काल निर्धारण में उत्थापित की गई भ्रांतियाँ--

1. उत्तर दिशा में बदरिकाश्रम में ज्योतिर्पीठ स्थापना-युधिष्ठिर संवत् (Y.S.) 2641-2645

2. पश्चिम में द्वारिकाशारदा पीठ- यु.सं.(Y.S.) 2648

3.दक्षिण शृंगेरीपीठ- 2648 Y.S.

4. पूर्व दिशा जगन्नाथपुरीगोवर्द्धन पीठ2655 Y.S.

शंकराचार्य जी ने इन मठों की स्थापना के साथ-साथ उनके मठाधीशों की भी नियुक्ति की, जो बाद में स्वयं शंकराचार्य कहे जाते हैं। जो व्यक्ति किसी भी मठ के अंतर्गत संन्यास लेता हैं वह दसनामी संप्रदाय में से किसी एक सम्प्रदाय पद्धति की साधना करता है। ये चार मठ निम्न हैं:-

श्रृंगेरी मठ - श्रृंगेरी मठ भारत के दक्षिण में चिकमंगलुुुर में स्थित है।श्रृंगेरी मठ के अन्तर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती तथा पुरी सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है।

इस मठ का महावाक्य 'अहं ब्रह्मास्मि' है तथा मठ के अन्तर्गत 'यजुर्वेद' को रखा गया है। इस मठ के प्रथम मठाधीश आचार्य सुरेश्वरजी थे, जिनका पूर्व में नाम मण्डन मिश्र था।वर्तमान में स्वामी भारती कृष्णतीर्थ इसके 36वें मठाधीश हैं।

गोवर्धन मठ - गोवर्धन मठ भारत के पूर्वी भाग में ओडिशा राज्य के जगन्नाथ पुरी में स्थित है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'वन' व 'आरण्य' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है।

इस मठ का महावाक्य है 'प्रज्ञानं ब्रह्म' तथा इस मठ के अंतर्गत 'ऋग्वेद' को रखा गया है। इस मठ के प्रथम मठाधीश आदि शंकराचार्य के प्रथम शिष्य पद्मपाद चार्य हुए। वर्तमान में निश्चलानन्द सरस्वती इस मठ के 145 वें मठाधीश हैं।

शारदा मठ - शारदा (कालिका) मठ गुजरात में द्वारकाधाम में स्थित है। शारदा मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'तीर्थ' और 'आश्रम' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है।

इस मठ का महावाक्य है 'तत्त्वमसि' तथा इसके अंतर्गत 'सामवेद' को रखा गया है। शारदा मठ के प्रथम मठाधीश हस्तामलक (पृथ्वीधर) थे। हस्तामलक शंकराचार्य जी के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे।हस्तामलक आदि शंकराचार्य के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे। वर्तमान में पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी इसके 80 वें मठाधीश हैं ।

ज्योतिर्मठ - उत्तरांचल के बद्रीनाथ में स्थित है ज्योतिर्मठ। ज्योतिर्मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद 'गिरि', 'पर्वत' एवं ‘सागर’ सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। इस मठ का महावाक्य 'अयमात्मा ब्रह्म' है। इस मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है। ज्योतिर्मठ के प्रथम मठाधीश त्रोटकाचार्य बनाए गए थे। वर्तमान में "परमाराध्य" परमधर्माधीश अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज '1008' जी इसके 53 वें मठाधीश हैं।

उक्त मठों तथा इनके अधीन उपमठों के अंतर्गत संन्यस्त संतों को गुरु बनाना या उनसे दीक्षा लेना ही हिंदू धर्म के अंतर्गत माना जाता है। यही हिंदुओं की संत धारा मानी गई है।

बद्रीनाथ में ज्योर्तिमठ, द्वारिका में शारदा मठ, जगन्नाथ पुरी में गोवर्धन मठ, मैसूर में शृंगेरीमठ ।

द्वादश ज्योतिर्लिंग - 

सोमनाथ (गुजरात), नागेश्वर अथवा नागनाथ (गुजरात), भीमशंकर (महाराष्ट्र), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), घुश्मेश्वर "घृष्णेश्वर" (महाराष्ट्र), महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर अथवा अमलेश्वर (मध्य प्रदेश), वैद्यनाथ (झारखण्ड), केदारनाथ (उत्तराखण्ड), विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश), रामेश्वरम् (तमिलनाडु), मल्लिकार्जुन (आन्ध्र प्रदेश)।

देवी मां के 52 शक्तिपीठों की पूरी सूची

1. मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश,2. माता ललिता देवी शक्तिपीठ, प्रयागराज  

3. रामगिरी,

महाभारत अनुसार में प्राग्ज्योतिष (असम), किंपुरुष (नेपाल), त्रिविष्टप (तिब्बत), हरिवर्ष (चीन), कश्मीर, अभिसार (राजौरी), दार्द, हूण हुंजा, अम्बिस्ट आम्ब, पख्तू, कैकेय, गंधार, कम्बोज, वाल्हीक बलख, शिवि शिवस्थान-सीस्टान-सारा बलूच क्षेत्र, सिंध, सौवीर सौराष्ट्र समेत सिंध का निचला क्षेत्र दंडक महाराष्ट्र सुरभिपट्टन मैसूर, चोल, आंध्र, कलिंग तथा सिंहल सहित लगभग 200 जनपद महाभारत में वर्णित हैं, जो कि पूर्णतया आर्य थे या आर्य संस्कृति व भाषा से प्रभावित थे। इनमें से आभीर अहीर, तंवर, कंबोज, यवन, शिना, काक, पणि, चुलूक चालुक्य, सरोस्ट सरोटे, कक्कड़, खोखर, चिन्धा चिन्धड़, समेरा, कोकन, जांगल, शक, पुण्ड्र, ओड्र, मालव, क्षुद्रक, योधेय जोहिया, शूर, तक्षक व लोहड़ आदि आर्य खापें विशेष उल्लेखनीय हैं।

बाद में महाभारत के अनुसार भारत को मुख्‍यत: 16 जनपदों में स्थापित किया गया। जैन 'हरिवंश पुराण' में प्राचीन भारत में 18 महाराज्य थे। पालि साहित्य के प्राचीनतम ग्रंथ 'अंगुत्तरनिकाय' में भगवान बुद्ध से पहले 16 महाजनपदों का नामोल्लेख मिलता है। इन 16 जनपदों में से एक जनपद का नाम कंबोज था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार कंबोज जनपद सम्राट अशोक महान का सीमावर्ती प्रांत था। भारतीय जनपदों में राज्याणि, दोरज्जाणि और गणरायाणि शासन था अर्थात राजा का, दो राजाओं का और जनता का शासन था।

राम के काल 5114 ईसा पूर्व में नौ प्रमुख महाजनपद थे जिसके अंतर्गत उप जनपद होते थे। ये नौ इस प्रकार हैं- 1.मगध, 2.अंग (बिहार), 3.अवन्ति (उज्जैन), 4.अनूप (नर्मदा तट पर महिष्मती), 5.सूरसेन (मथुरा), 6.धनीप (राजस्थान), 7.पांडय (तमिल), 8. विन्ध्य (मध्यप्रदेश) और 9.मलय (मलावार)।

16 महाजनपदों के नाम :

 1. कुरु, 2. पंचाल, 3. शूरसेन, 4. वत्स, 5. कोशल, 6. मल्ल, 7. काशी, 8. अंग, 9. मगध, 10. वृज्जि, 11. चे‍दि, 12. मत्स्य, 13. अश्मक, 14. अवंति, 15. गांधार और 16. कंबोज। उक्त 16 महाजनपदों के अंतर्गत छोटे जनपद भी होते थे।

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Service Providers Directory

 


Service Providers Directory 

The purpose of creating a Service Providers Directory is to provide information about various types of service providers like Doctors,Lawyers,Chartered Accountant,Consultant,Insurance agents, Carpenters,Electricians,Car, AC mechanics,RO mechanics,CHIMNEY SERVICE,DRYCILING, Laptop,TV & Software Developer,Property Dealers, Fabricator,PAINTER,MOBILE REPAIR and other service providers.Your cooperation is expected.

Information Consultant - sumansangam1957@gmail.com 


Sumansangam.com


AC & FRIDGE

S N

Name

Category

Mobil 1

Mobile2


1

Jitendra

AC

7210609316

8076906433


2

Manisha Kumar

AC

9717813542



3

Dharmendra

AC

8802267990



4

Suraj

AC

88518 90939

9968614974


5

Rajiv Bharti 

ACS

90159 54829



6

Rahul

AC

9654174680



7

Hemant

AC

9582826717

8800815256


8

Vikas

AC

9899622581



9

Vishnu

AC

97181 49776



10

Ranjit

AC

8178968071



11

Sumit

AC

9818117871



12

Surender

AC

9873731089



13

Chandan

AC

8210403830

7210033927


14

Bhajan

AC

9990490131



15

Birendra

AC 

9810566854



16

Birendra Sharma

Fridge

9810566854



17

Bunty Sharma

Fridge

9758886684



18

Chander prakash sharma

Fridge

7503282584



19

Sandeep Singh

Fridge

9355400225



20

DAVID SINGH

AC

9718430435



21

Sonu

A C

9555738675


NOIDA


BARBER


SN

NAME

Work CATEGORY

MOBILE

1

Sanjay kumar

Barber

8287448631


Baraf Wala 


SN

NAME

MOBILE

MOBILE

1

PAPU RATHORE

9871212845




CHIMNEY SERVICE

SN

NAME

CATEGORY

MOBILA

MOBILE

1

Alok

Chimney

8588857505


2

Sunil

Chimney

9873923247


3

NITIN

CHIMNEY

6396080226



Chartered Accountant


NAME

Category

MOBILE

Mobile 

Place

ABHAY MADHAV

C A 

9582212755



ANIL JAIN

C A

9899361102



RAJENDER SINGH

CA

7011970212



SHAIL RASTOGI

C A 

9811685947



Avinash 

C A

981110557


N C R


Consultant

Name

Work Category

mobile

mobile

Place 

Sourabh Sharma

ADVOCATE    

9310551957


N C R

Mukesh Gupta

INSURANCE

9899104053


Noida

Sharma Ji

ASTROLOGER

9560518227


N C R

Dr Piyush Kumar Soni

Reiki healer

9312365681


N C R,DIVINE HEALER


CARPENTER


Daya Shankar

carpenter

9821460161


Mithilesh

Carpenter

9576003532


Neeraj

Carpenter

9650781442


Pankaj

Carpenter

8750264005


Ramsurat

Carpenter

8800767482


Shiv Kumar

Carpenter

9818038473


Sonu

Carpenter

9315416128


Uday

Carpenter

9589467847


Vyas Sharma

Carpenter

8285099975


Shivam

Carpenter

9560668973

9560528083

Dilip Sharma

Carpenter

8527301448


Manoj Sharma

carpenter

9540154619



CAR REPAIR


SN

Name

Work Category

Mobile-1

Mobile-2

1

MAHESH

CAR MECHANIC 

99587042757



DOCTOR 

Dr Deepti Srivastav

Satvik Dental Clinic

9953557216


Noida

Dr ANIL CHAUHAN 

E N T

98104 27743

7065514144

Noida

Dr C R Mandal

Homeopathic 

9717285939

N C R

Noida

Dr Anudeepika SHAHI

Impantologist

8948776781


Noida

Dr Prashant SHAHI

Orthodontist

8948776781


Noida

Dr Namrata

Dental Care 

8527902101


Noida

Dr Devender Yadav

Valpinushealthcare

9891870027


Delhi


DRYCILING


SN

NAME

CATEGORY

MOBILE

MOBILE

1

ANGAD DRYCLIING

DRYCILING

8539983779



 Electrician


Name

Work Category

Mobil 1

Mobile2

Place

Vivek Kumar Soam

Electrician

8744836583



Raju

Electrician

9540498757



Bhupinder

Electrician

9250726669



Devender

Electrician

9555736620



Jitender

Electrician

7991127121



Ravi

Electrician

9718702336



Sonu

Electrician

8802187178



Tiwari

Electrician

9599144431



Manoj

Electrician

9811868852



UDAY RAJ SINGH

Electrician

9818018180









 Fabricator


Name

Work Category

Mobil 1

Mobi

Place

D S INTERIORS

ALL INTERIOR WORK

9958139044

9311577021

noida

Brijesh

Glass

9560256287

7982199729


Brijesh

Iron Fabricator

9560256287

7982199729


Rohtas

Iron Fabricator

9873255516

9873400126


Hare Ramji Ram nagar

Iron/Steel Fabricator

7836891088



Mahendra Sharma

Iron/Steel Fabricator

9818191420



D K Welding

Iron/Steel Fabricator

9818605022



Ranjeet Gupta

Aluminum works

8851403289



Bhumika

Furniture

9999350686



Hari Bhajan

Furniture

9953324888



Ramashray

Fabricator

8582638132



Rathi UPVC Sourabh

Fabricators 

9627043811


NOIDA


 Kabadiwala,Key Maker


Name

Work Category

Mobil 1

Mobile2

Kabadiwala

Kabadiwala

7292038392


Chabiwale Sardar ji

Key Maker

9711369494


Khem Singh

Key Maker

7065154572


Singh Key maker

Key Maker

9711095663


Singh Key wala

Key Maker

8447292956



KeyMaker

9953792943



KeyMaker

7065154572

9717269092


Laptop


SN

NAME

SERVICE

MOBILE

MOBILE

1

V P SINGH

Laptop/Computer

9899353512


2

Sanjeev Computer Repair

Laptop/Computer

8860577527


4

7X COMPUTER

Laptop/Computer

9310027373



MASON

39

Dhamna

Raj Mistri

9315243452



MOBILE REPAIR


SN

NAME

WORK CATEGORY

MOBILE

MOBILE

1

Hari Gupta

Mobile repair

9818458934


2

Rohit

Mobile Repair

8800489299



PLUMBER

1

Manoj

Plumber

8527272597

9354699417

2

Anil

Plumber

9711516357


3

Mahesh

Plumber

9810296406


4

Ranjeet

Plumber

9971841202


5

Vikas

Plumber

8851179758



PAINTER


1

Akhilesh Mishra

Painter

8929397228


2

Amrit

Painter

6393635173


3

Ashok

Painter

9350822055


4

Gudu

Painter

9540495737


5

Pappu Sorkha

Painter

7550706263


20

Ramnath

Painter

9718275431


21

Sanjay

Painter

7042485455


22

Sarvesh

Painter

9650838806


23

Vinod Kumar

Painter

9761240138

9457338348

24

Kishan

Painter

9650070929


26

Ramakant

Painter

9575040303


26

Deshraj Sector 74

Painter

8745056820


27

Amarjit Singh

Painter

7607271749


28

Manoj

Painter

9289907051




Property Dealer 


Name

Mobile

mobile

Place 

Rank 

Ramdev

9810771336


Noida


Abhitosh

9811542176


Noida



PHYSIOTHERAPIST


SN

NAME

CATEGORY

MOBILE

MOBILE

1

DR PREETI JAIN

PHYSIOTHERAPIST

9582509012


2

Home Healthcare Service

Patient Care At Home 

9520144244




Patient care home 

9520144244















R O MECHANIC & R O WATER


1

Rahul

RO

9599242568


PLACE

2

Sanjay

RO

9810410850



3

Sanjay

RO

9582068144



4

Vikas Aggarwal

RO

9654386495



5

Anil Sharma

RO

9811177582



6

Rajesh Trivedi

RO

9711040480



7

Ramakant

RO

9810773210



8

A TO Z RO

RO

9999203966

9718696695


9

Tiwari

RO

9654046042



10

Sachin Yadav

Ro





Sofa & Sofa Repair


1

Mahesh Chand Sharma 

Sofa repair 

9312231205


2

Navin Shree Bala ji Furniture 

Sofa

9654426957


3

Kashi Nath

Sofa REPAIR 

7982130301


4

Manish

Sofa Repair

9868772266



TV


SN

NAME

SERVICE

MOBILE

MOBILE

1

Amit

TV

9911190011


2

Rajesh Singh

T V

9810840954



Taxi,Mover & Packer


SN

Name

Work Category

Mobil 1

Mobil2


1

Kuldeep sai

Taxi Operator

9718700200



2

Sandeep

Mover Packer

9911595924



3

Tiwari

Mover Packer

9811126229



4

BALJENDER SINGH

TAXI OPERATOR

9717543588



5

K P 

DRIVER

8383991779




Gyan chand Sharma

Transport Service

9810429450

8368827544

All over India



NATE-You should satisfy yourself with all types of service providers ,we have given only the information of the service providers.

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वैवाहिक संबंध बनवाने हेतू हमने इस फार्म  का निर्माण किया है,यह सेवा निशुल्क है। 

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हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

   हरियाणा के हिसार ( वीर बरबरान ) मे एक पीपल का पेड़ है जिसको वीर बर्बरीक ने श्री कृष्ण भगवान के कहने पर अपने वाणों से छेदन किया था !  आज भ...